Riot Games बंद करेगा League of Legends

Riot Games लॉन्च के करीब छह महीने बाद League of Legends Classic को बंद कर देगा, जिससे नॉस्टैल्जिया वाले इस मोड का सफर खत्म हो जाएगा।
Riot Games ने League of Legends Classic को बंद करने का फैसला किया
Riot Games ने पुष्टि की है कि League of Legends Classic, यानी गेम के पुराने दौर को वापस लाने वाला नॉस्टैल्जिया मोड, लॉन्च होने के करीब छह महीने बाद ही बंद कर दिया जाएगा। यह फैसला उस प्रोडक्ट के लिए बेहद छोटा सफर साबित हो रहा है, जो पूरी तरह पुराने गेमप्ले को लेकर प्लेयर्स की भावनाओं पर टिका था।
बंद होने का मतलब क्या है
League of Legends Classic को इस तरह डिज़ाइन किया गया था कि पुराने प्लेयर्स गेम के पिछले दौर का अनुभव दोबारा ले सकें। ऐसे मोड आमतौर पर अलग बिल्ड या अलग रूलसेट पर चलते हैं, जो लाइव गेम से अलग होते हैं। इससे मेंटेनेंस का लगातार बोझ बना रहता है। पुराने वर्जन को मेन क्लाइंट के साथ चालू रखने के लिए अलग इंजीनियरिंग, बैलेंसिंग और सर्वर रिसोर्स चाहिए, जो मुख्य कॉम्पिटिटिव इकोसिस्टम को कोई फायदा नहीं पहुंचाते।
करीब छह महीने की अवधि परमानेंट गेम मोड के हिसाब से बहुत कम है, लेकिन लिमिटेड-टाइम या एक्सपेरिमेंटल ऑफरिंग्स के लिए यह असामान्य नहीं है। Riot ने ऐतिहासिक रूप से एनिवर्सरी इवेंट्स, रोटेटिंग गेम मोड्स और सीज़नल एक्सपेरिमेंट्स को परमानेंट फीचर की तरह नहीं, बल्कि टाइम-बाउंड कंटेंट की तरह ट्रीट किया है। Classic भी उसी पैटर्न पर चलता दिख रहा है।
कंपनियां पुराने मोड्स क्यों हटाती हैं
प्रोडक्ट के नज़रिए से देखें तो लिगेसी मोड्स में एक जाना-पहचाना ट्रेड-ऑफ होता है। ये शुरुआत में जबरदस्त एंगेजमेंट और पॉज़िटिव सेंटिमेंट पैदा कर सकते हैं, खासकर उन वेटरन प्लेयर्स के बीच जो गेम के पुराने वर्जन से जुड़ाव महसूस करते हैं। लेकिन नॉवेल्टी खत्म होते ही यह एंगेजमेंट अक्सर गिरने लगता है, जबकि समांतर कोडबेस बनाए रखने की लागत लगातार बनी रहती है।
एक कॉम्पिटिटिव पहलू भी है। पुराने मैकेनिक्स को सहेजने वाला मोड लाइव गेम से ध्यान और प्लेटाइम खींच सकता है, जबकि Riot अपने बैलेंस पैच, ईस्पोर्ट्स इकोसिस्टम और मॉनेटाइज़ेशन पर लाइव गेम में ही फोकस करता है। जब किसी साइड मोड की पॉपुलेशन उस थ्रेशोल्ड से नीचे गिर जाती है जितनी हेल्दी मैचमेकिंग के लिए ज़रूरी है, तो बचे हुए प्लेयर्स का एक्सपीरियंस खराब होने लगता है और गिरावट और तेज़ हो जाती है।
प्लेयर्स को क्या उम्मीद रखनी चाहिए
प्लेयर्स के लिए असल बात यह है कि League of Legends Classic को परमानेंट ठिकाना नहीं, बल्कि लिमिटेड-टाइम एक्सपीरियंस मानना चाहिए। जो प्लेयर्स इस मोड में वक्त बिताना चाहते हैं, उनके पास एक तय विंडो है। बंद होने के बाद League of Legends का लाइव वर्जन ही खेलने का मुख्य ज़रिया रहेगा।
Riot ने इस क्लोज़र को कॉन्सेप्ट की पूरी नाकामी के तौर पर पेश नहीं किया है। लिमिटेड-रन मोड्स स्टूडियो को आइडियाज़ टेस्ट करने, फीडबैक जुटाने और यह तय करने का मौका देते हैं कि कौन-से एलिमेंट्स आगे ले जाने लायक हैं। कोई मोड बंद हो सकता है, फिर भी भविष्य के डिज़ाइन फैसलों में काम आ सकता है।
बड़ा पैटर्न
यह मामला लाइव-सर्विस गेमिंग की एक बड़ी सच्चाई दिखाता है। नॉस्टैल्जिया नए प्लेयर्स लाने और पुरानों को रोकने का ताकतवर टूल है, लेकिन इसे परमानेंट प्रोडक्ट लाइन की तरह चलाना मुश्किल है। पुराने बिल्ड्स में वह लगातार कंटेंट पाइपलाइन नहीं होती जो आधुनिक लाइव गेम को ताज़ा बनाए रखती है, और उनकी ऑडियंस भी आमतौर पर छोटी होती है। इसलिए कंपनियां इन्हें इवेंट की तरह ट्रीट करती हैं: धूमधाम से लॉन्च करो, तय अवधि तक चलने दो, और फिर तय शेड्यूल पर बंद कर दो।
लीग ऑफ लेजेंड्स के खिलाड़ियों के लिए यह ऐलान एक याद दिलाने वाली बात है कि हर मोड हमेशा के लिए नहीं बनाया जाता। क्लासिक का छह महीने का सफर इसे कोर गेम के बजाय दूसरे टाइम-लिमिटेड एक्सपेरिमेंट्स की कतार में खड़ा करता है।